Sunday, 13 April 2014

परिभासा ही बदल दी

भैया एक सांसद चुनो , सरकार नहीं , सरकार चुनना या बनाना उन 545 लोग का काम है जिनको आप चुन के भेजेंगे ...ये उनकी जिम्मेदारी है की वो एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर सहमत हो और सरकार बनाये ... अमरीका में भी अर्थव्यवस्था तब चरमरायी थी जब वहां स्थायी और स्टेबल सर्कार थी ......स्टेबल सरकार चुनने के चक्कर में सांसद चुनना भूल जाओगे क्या ....कैंडिडेट देखो ,पार्टी नहीं ..वोट देने की सोचो.......लोरेअल पेरिस का शैम्पू नही है सर्कार बनाना जो आपने ब्रांड देखा और फेक दिया अपना वोट .... कोई समझ न आये तो नोटा का प्रयोग करो ...स्टेबल सरकार की ठेकेदारी संविधान ने किसी भी नागरिक को नही दी है , ये सब "सहूलियत की राजीनति के चोचले जो भी चाहे सोच ले" की नीति का परिणाम है जो आपको अपना अभीस्ट कर्तव्य स्थायी सर्कार चुनना समझ आता है न की एक उम्दा सांसद चुनना .....संविधान में बस अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार दिया गया है .....पूर्वजो को ज्ञान होता की संविधान और राजनीती के दुर्गति के ऐसे स्वरुप इतनी जल्दी देखने को मिल जायेंगे तो वो प्रस्तावना में ही लिख देते की भैया 18 से ऊपर वालो को सांसद चुनना है सरकार नहीं ............. आमिर खान भी गलत बोलते हैं -"देश का सबसे बड़ा लोकतंत्र चुनावों में अपनी सरकार चुनेगा "... एक बात वो सही भी बोलते हैं - अच्छा चुनो सच्चा चुनो ... अगर सर्कार चुननी होती तो वो बोलते "अच्छी चुनो सच्ची चुनो "...... बाकी चवन्नी भर ज्ञान तो सबके पास है उसका प्रयोग करो
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