अपने दिमाग में एक पंक्ति से लोगो को खड़ा कीजिये ,उनलोगों जिनको आप सूरमाओ का दर्जा देने की उदारता रखते हैं . अब इनकी जिंदगियां गौर से देखिये। सबने घुटने टेके हुए हैं कहीं न कहीं। उनकी सुरमा दिली बस अपने मंतव्यो तक सीमित है अपना जॉब अपना बिज़नस अपना इश्क अपनी ख्वाइश।
थोडा जूम आउट कीजिये , "कलेक्टिव रेस्पोंसिबिल्टी" देखिये - अपना परिवार , अपना घर , अपनी कॉलोनी या बहुत जयादा तो अपने पडोसी और मोहल्ला।
थोडा और ज़ूमआउट - अपना धर्म ,अपना कुनबा , अपना मजहब।
मैक्सिमम ज़ूम आउट - अपना देश।
इससे ज्यादा ज़ूम आउट करने पे कोई भी उदहारण आपको निराश ही करेगा।
यूरोप में रिफ्यूजी बेचारे पनाह लेने आने लगे तो तथा कथित मानवतावादी और कोस्मोपोलिटन्स की राष्ट्रीयता जाग गयी।
अमीरी का चोला ओढ़े देश , खाद्य सुरक्षा और सुरक्षा का राग अलापने लगे।
ज़ूम आउट बस देशभक्ति तक ही सीमित रहता है ।
देश भक्ति भी एक बेहतरीन अंध भक्ति है , देश कैसा भी हो दिल गुरेज नही करना चाहिए।
तो सीरिया और लीबिया के लोग क्यों भाग रहे हैं वहां से ?- देखा सर इसमें भी अपना ही मंतव्य है , देशभक्ति भी तभी तक जब तक पिछला ज़ूम सुरक्षित रहे ।
पिछला ज़ूम मतलब वही परिवार बिजनेस इश्क मोहल्ला आदि
सारा परिप्रेक्ष्य मैं, मेरा, मुझ पर आधारित
भारत महान भी बोलते हैं तो "मेरा भारत महान " । अगर संयोग से मेरे भारत की परिभासा आपके भारत से मैच नही की तो दो-दो भारत महान हो जायेंगे एक तेरा वाला और एक मेरा वाला फिर अगर कोई तीसरी पार्टी आ गयी तो वो अपनी परिभासा बताएगी।
लेकिन मूल भावना वही है "मैक्सिमम ज़ूम इन पर बेस्ड "।
सब निचोड़ यही है , मेरा और सिर्फ मेरा चलना चाहिए , आप मेरे वाले "मेरेपन " से विचलित हुए नही की अगले कलबुर्गी आप बन जायेंगे और शायद तब आपके लिए कोई उदय प्रकाश साहित्य अकादमी पुरस्कार छोड़ने की हिम्मत छोडिये, गुजारिश भी न कर सके।
अपेक्षाकृत विकसित वेस्टर्न उत्तर प्रदेश में आता है दादरी , - "मेरेपन" के वहशीपन ने ऐसा लपेटा सबको कि किसी दुसरे का "मेरापन" पसंद नही आया और उसको बेदर्दी से मौत के घाट उतार दिया
जब तलक मुर्दा तैरती लाशो ने भूमध्य सागर से लगी यूरोपी सीमओं पर दस्तक नही दी , यूरोपी "मेरेपन" में दरार नही आई।
हम कौन से माहौल में सांस ले रहे हैं? , इसमें सडांध है कडवे मेरेपन की
और परिवार ,मोहल्ला, धर्म, मजहब ,देश ये सब उस "मेरेपन" की बड़ी बड़ी होर्डिंग हैं जिनके कोने में "सौंजन्य से" लिख कर किसी सेना , वाहिनी , क्लब , राजनीतिक शख्स या किसी रुद्राक्षी बाबा का नामकरण रहता है।
कोई विकल्प सूझे तो मुझे भी इत्तला करना