Monday, 28 January 2013

तो जी है बिगाड़ दूँ सारी, दुनिया उजाड दूँ सारी


कुछ शौक आपको उम्र से बड़ा बना देते हैं , कुछ शौक आपको शौक से बढ़ कर सोचने पे मजबूर करते हैं ........मैंने साइकिल चलाना तब सीखा था जब आठवी में था ....शायद इसीलिए दुपहिया और चार पहिया  का शौक अभी तक बरकरार है .......... कॉलेज में मैं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कभी भाग नही लेता था लेकिन उनको आरगनाइज करने में बहुत योगदान करता था .......मेरा काम अक्सर मेहमानों अतिथियों को स्टेसन से उठा कर लाना होता था (दक्षिण भारतीय प्रिंसिपल कि भासा यही थी , श्री xyz स्टेसन पे है उठा लाओ ).........एक एन जि ओ और NACO का कैंप लगना था चमनगंज में इस बार , मुझे(AGE 19) ,राधे(AGE 20) दीपक(19) शिवम(सत्तरा का था , लेकिन साथ आने के लिए EIGHTEEN लिखवाया था ) और निकिता(AGE 18) को volunteer  के लिए चुना गया था ...मुझे AS USUAL  डाक्टरों को “उठा के लाने”  कि जिम्मेदारी दी गई थी 

.......चमनगंज में पान कि पीको के बीच बसी एक OVERPOPULATED बस्ती ............वहाँ सब अलग ही दीखता है , मैं अजीब  से प्रेशर में था ......मेरे सामने ५ महिलाओ या फिर यूँ कहो “लड़कियां जिनको महिला बना दिया गया था", का रिजल्ट पॉजिटिव निकला था , मैं खुद को उन पांचो के सामने रोक नही पाया ....बहार निकल के आ गया , सिगरेट जलाया ............बहार पीपल का पेड़ था , बगल में NACO  कि वेन खड़ी थी ..पास में किसी ने हनुमान जि का बुत  रखकर मंदिर बना दिया था ......मूर्तिया बड़ी खामोश होती हैं , कोई भी कहीं भी रख देता है ,,,,कभी कुछ शिकायत नही करती ......यहाँ एक बात और क्लेअर हो गई , टिकते वही है जो शिकायत नही करते जैसे इन दैवीय बुतों को ही  ले लो .....................और सबसे बड़ी बात ,उनके सामने कोई भी बुरे से बुरा काम होता रहे वो भगवान कि बेशर्मी को प्रदर्शित करती हुई मुस्कराती ही रहती है .....उस मंदिर को देख के जेहन में बस एक ही पंक्ति किसी के भी दिल में आ सकती है –जला दो इसे फूँक डालो ये दुनिया....
...................
गायत्री जी, मेरे बगल में आ कर बोलती हैं हस्ते हुए  – बहार सिगरेट पीने आये हो , अंदर तो न जाने क्या क्या होता है सिगरेट कौन बड़ी बात है ...SEX WORKER बोलते हैं ..

....मैं उखड़ी आवाज में “जनता हूँ ” ................ओह जानते हो , ओके 

....कुछ नेपाल से है कुछ पाकिस्तानी हिंदू हैं .......


एक लड़की १० साल कि शायद , काले घुंगरालेबाल दो चुटिया , लाल फीते से बंधे हैं , सांवला रंग  रेड फ्रोक में ....... मैं गौर से उसे देख हे रहा था ........कि आवाज आती है , ये सोना है , पॉजिटिव है ( गायत्री जी ने बताया)


“जन्म भी क्या अजीब एक्सीडेंट है इसके लिए , अक्षम्य अपराध है खुदा का जो इसको पैदा होने दिया ”

, स्टेसन से लाते वक्त एक डॉक्टर साब से अच्छी दोस्ती हो गई थी , वो अंदर चाय के लिए बुलाते हैं ........तकरीबन एक घंटा एक्सामिन हुआ सबका ..... ऊपर खिडकी से फटी साडी  के बने परदे को हटा कर कुछ लड़कियां झांक रही है , अपनी जिंदगी में पहले कुछ शख्स मैंने ऐसे देखे थे जिनकी आँखों में सपने नही थे ........मैंने उन डाक्टर साब से तभी बोला था कि अगली दफे कानपुर आये तो मुझसे जरुर मिल लेना .....आप ये सब जो कर रहे है काबिले तारीफ है ...


..............तभी बहार कुछ शोरगुल हुआ था , तीन चार बोलेरो में कुछ सफ़ेद स्वच्छ कपड़ो में  १५ २० लोग , देखने में देश के रहनुमा टाइप लग रहे थे .......आगे वाले तीन के गले में सोने कि मोटी चैन ,, कलाई पे रुद्राक्ष गुथी हुई थी ........मोटी आवाज में एक बोलता है “ऐ ये किसका तमाशा है , कौन किया है ये कैंप यहाँ ”गायत्री जी आगे आती है , हमारा NGO,  स्टेट गोवेंमेंट से अप्रोवेड है ये कैंप.................... .......मोटी आवाज थोडा और मोटी हुई – अरे तुम लोग ही  तो कैंप लगा लगा के इस गंदगी को यहाँ से जाने नही दे रहे हो , अरे ये मरेंगी तभी तो साफ़ होगी ये बदबू यहाँ से .........अभी तुम लोग इनको कंडोम बांटोगे तो इनको बढ़ावा ही मिलेगा न धंधा करने के लिए .............ऐ डॉक्टर उठाओ ये अपना तीम झाम, हो गया सब AIDS test phest …..तीन चार पुलिस वाले अंदर आते हैं ....मैंने भी सामान उठाने में मदद कि , दवाइयां अभी पैकेड ही  रखी थी , डॉ साब भी अब गाडी में बैठ गए .....मैं तेजी से गाड़ी निकालता हूँ ,,,सामने सोना आ जाती है मैं जोर से होर्न देता हूँ , तो मु में कुछ बुदबुदा के टेढ़ी निगाह कर के चली जाती है ...जैसे हमारा मजाक उडा रही हो ......................डॉ. मेरे से बोले , बोलिए ओम जी किसका काम कबीले तारीफ है मेरा या उन का .......मैं शीशा खोल के अपना गुस्सा रिक्शा वाले पे निकलता हु “अबे जब नही चल पा रहा है तो किनारे चल न “ 

Friday, 25 January 2013

कोलाहल पीछे से आता है जब.................

साल 2007- तारिख लिखना शायद भूल गया था  पन्ने  पे  .........

महानगर बस में जनसंख्या वृद्धि के दुष्प्रभाव दिखने के चलते मैं प्राईवेट बस में हो लिया हूँ .........अगले स्टॉप पर जींस पहने हुई लड़की हमारे ही जैसे एक मित्र कि X RAY मशीन जैसी आँखों में आ जाती है विभिन्न प्रतिक्रियाओ के साथ  ...........उसको एक देहाती औरत( फीके लाल रंग कि साडी में,हाथ में प्लास्टिक कि बोरी में कुछ लिए हुए  ) फटकार कर भगाती है उसे  ...........आगे महानगर बस चल रही है , IIT KANPUR  के पास कुछ विदेशी खड़े हैं ........महानगर बस का कन्डक्टर ....एक हाथ से बस के हैंडल पकडे दूसरे हाथ को हिलाते हुए बोलता है "WELCOME TO KANPUR " ...................





Tuesday, 15 January 2013

रंगी को नारंगी कहे ..........

सुनने में आया था कि सुषमा स्वराज ने बयां दिया कि दो के बदले दस सर काट के लाओ 
,गौरतलब हो कारगिल युद्ध के समय इन्ही कि ही तो सरकार थी , तब डी डी नॅशनल पैर ये बताने के लिए कितने सर कटे और काटे गए हर घंटे समाचार सेवा शुरू कि गई थी ....
हमारी राजनीती का विकृत स्वरुप मुझे इतनी जल्दी देखने को मिलेगा ये मेरे पूर्वजो ने सोचा भी न होगा
ऐसा ही कुछ दिमाग में लिए हमारे मौलवी साब लौंग के दो दाने मु में दबा के तिरछी निगाह कर के बोले "भाई ये अपने यहाँ राष्ट्रपति नाम कि चिड़िया कब बोलेगी , अमा एक समय हुआ करता था जब हमारे यहाँ भी राष्ट्रपति हुआ करते थे , ज्यादा नही ये सब के आर नारायणन , और कलाम साहब का किया धरा है ....न इतनी शशक्त रास्त्रपति गिरी दिखाते , न ये अनभिज्ञ पोलिटिक्स वाले मुहर नुमा राष्ट्रपति को नामांकित करते " 
मैंने उत्सुकता में आ के बस इतना पूछा मौलवी साहब ठण्ड तो काफी हो चुकी क्या ख्याल है आगे का ..
मौलवी साब भड़क गए , ये मियां आप बात कि बघेल मत बजाओ , मुद्दत के बाद हम मुद्दे कि बात पे आये हैं , और आप हमको सोल दुनी आठ सिखा रहे है ,
भारत सर्कार कि  तरह ही , मैं बोल रहा हूँ गैस के दाम बढ़ गए तो सर्कार बोलती है पाकिस्तान में तो हमसे भी ज्यादा हैं गैस के दाम ............अमा मिश्रा जी तुम हे बताओ ये कोई तर्क हुआ , पाकिस्तान में तो राष्ट्रपति भी होते हैं , हमारे यहाँ है क्या , वहाँ कि जम्हूरियत में इतनी औकात होती है कि आये दिन प्रधानमंत्री को उखड फेक देती है और एक हम है जो बस गैस के दाम कॉपी करते हैं 
और चिल्ला रहे हैं कि सर काट दिया सर काट दिया , 
हम बोलते हैं हमको भूक लगी है , खाना मिलना चहिये , सरकार बोलती है आपकी शर्ट का रंग कला क्यों नहीं है
महिला कड़ी हुई , सुरक्षा के बारे में पुछा तो बोले आपको भारत में रहना चाइये क्युकी वहाँ रेप नही होते , कुछ लक्षम्न रेखा के बारे में बक रहे थे , 

पान कुतरते हुए , अबे ये भी कोई बात हुई , शीशे के खोल में लपेट के रख दिए जाते हैं , अंदर से बोलते हैं हरी ओम , बलात्कारियों को भैया बोलो ,रेप कि नौबत ही न आएगी .....और निचे लोग ताली बजाते हैं ......और सबसे बड़ी बात कमबख्त ये कि जितने ताली बजाते है उनमे से कोई भी भूखा नंगा नही होता ........
कहने के बापू से बोलो कभी बिहार जा के वहाँ भी कभी आधे पाँव पानी में डुबो कर धान कि रोपाई कर के हरी ओम बोले , अच्छा न हरी ओम सही , भैया ही बोल, दे ..................खेत भर पानी में चुल्लू भर पानी न नसीब होगा साब को ....बात करते हैं

................................अरे मियां क्यों गुस्सा रहे हो इतना , ठीक है मान लिया कुछ सही नही है 
............................................"ठीक है " तो बोलो ही मत , यहाँ आम आदमी कि ऊँगली सीधी से टेढ़ी हो गई , पर घी न निकला , निकला तो बस "ठीक है "
सब गडबड झाला है बंधू , हम बोलते हैं हमको सड़क दो वो बोलते हैं आपके जूते काले क्यों हैं , 
हम बोलते हैं पाकिस्तान वाला मामला रफा दफा क्यों नही करते तो बोलते हैं ,वीसा आन अराइवल 
हमने बोला बातचीत ही कर लो तो बोल दिए just chilll dhondu 

कबीर साब कहे थे 

रंगी को नारंगी कहे , बने दूध को खोया 
चलती को गाडी कहे , देख कबीरा रोया 






Sunday, 6 January 2013

स्टेसन पे अधूरे ख्वाब मोल्ड होते हैं


मौसम अजीब ही ठंडा है ...बता रहा है कि वो है मानो खुदा इल्म करा रहा है................. .......कमरे में अजीब से आवाज है सन्नाटे कि  , हर कुछ मिनट के बाद लगता है , दरवाजा खुला है शायद , ये बहार कि हवा को खुदा ने पनाह नही दी अपनी छत के निचे जो कमबख्त मेरे कमरे में चली आ रही है ......
और हाँ घडी अपनी अलग ही जिम्मेदारी पूरी करती है इन दिनों , मुसलसल बताती रहती है कि ठण्ड का एवाल्युसन करने से ठण्ड कम न हो जायेगी ......रजाई तो बाहे पसारे ऐसे  देखती है मानो चिढा रही हो कि एक बार मेरे साथ हो जाओगे तो ब्रेक अप न कर पाओगे ........शेल्फ से डेवेलोपमेंट इकोनोमिक्स कि बुक ऐसे झांक रही है जैसे रजाई से दोस्ती निभा रही है , वैसे ही मिजाजपुर्सी से चिढा रही है .........अजब ही  मिजाज है ..................
पर रजाई से ब्रेक अप करने में कामयाब हुआ मैं , तैयार होता हूँ ....नीली वाली जींस कि जेब में हाथ डाल कर बाहर निकलता हूँ , बहार निकलते ही ऊपर बताई गई बातों मे और अनर्गल बातों में फर्क मिटने लगता है .......उम्मीद से ज्यादा ठण्ड है ...........रेलवे स्टेसन पर लेकिन लोगो का अलग ही  स्टाइल  देखने को मिलता है , सब अपने अपने समय से ट्रेन को चला रहे होते हैं ........और मुझे तो ताज्जुब होता है कि ट्रेन ड्राईवर ठण्ड में इन ठंडी चिकनी मासूम पटरियों को देख कर क्या सोचते होंगे
कुछ देर IRCTC के बुक काउंटर पर ...... कुछ देर अखबार में ............बायीं और नजर घुमाते ही एक लड़की बड़े बड़े दो बैग के साथ  बैठी है , ...मेरे देखते ही आँखों से पलट वार , मुझे नजरे झुकानी पड़ती हैं , जेहन पढ़ने में वाकिफ दिखती है और समाने  में एक बाबा भगवा वस्त्रों में तीन चार पोटली बनाये हुए , हाथ में अलुमिनियम कि एक बाल्टी लिए बांदा पस्सेंजर का वेट कर रहे हैं शायद .....एक बच्चा रो रहा है , रेलवे ट्रैक पे सु सु करने कि जिद कर रहा है , यहाँ ये क्लिएर  हो गया कि बच्चे बाप पे ज्यादा जाते हैं , एक महिला पानी कि बोतल के दाम के लिए झगड रही है , उसका तर्क है कि सर्दियों में भी इतना महंगा क्यों ....लेकिन बायीं और पलट कर देखना ज्यादा दिलचस्प था , .......इन्तजार करते वक्त ई बार घडी पे डाउट होता है , एक महिला बड़ी बेरुखी से शक्ल लिए बैठी है चुपचाप , जैसे चुप रहना उसके नचुरल इंस्टिंक्ट के अगेंस्ट है ....अपने खिलाफ जा कर के चुपचाप बैठी हो मानो .............

दिल में ख्याल आया , कभी कभी मैं कितना आसान हो जाता हूँ , साडी दुनिया समझ आ रही है , कोई केंस ,मार्शल , पिगू या फिर गवर्नर जनरल के रेफोर्म्स को जरा भी तवज्जो नहीं है ..............सारा आलम ऐसा है कि बस देवानंद के जैसे झूमने का मन कर रहा है .......जक्केट कि जेब से सिगरेट निकलते हुए एक साहब आ कर पूछते है , ये स्वत्रता सेनानी किस पे आएगी – दिल से आवाज आई “पटरी पर ” बट सामाजिक आस्था और व्यवहारिक व्यवस्था ने दिल को रोक कर जवाब दिया – प्लेटफार्म ३ पे ....आज ४ घंटे लेट है , अगर स्केच बनाना जानता तो इस समयढेरो ऑब्जेक्ट मिल जाते स्टिल, सारे के सारे , कुछ शाल सँभालते हुए बोले हे जा रहे है आज तो हद्द हो कर दी ठण्ड ने .........
कुछ सोचना ही  बेहतर है , तुम्हारे बारे में सोचना बेहतरीन है ...... बेवक्त  "बेवजह "ज़ेहन में दाखिल होना तुम्हारा ही काम है  ....कॉलेज के कई बंदे याद है मुझे जो मुझे देख कर तुमको याद करते थे

कुछ चीजे  अपने बस में होती ही नही है , इन चीजों को खुदा ने खत्म किया , मेरा तो कोई हाथ ही नही था ....
कई बार सोचता हूँ , दिल में पक्का गहराई होती है !!        ,,,,,,,,,,,,,,,बड़े भीतर तक के गम उचक के बहार आते है , कोई उत्प्लावन बल भी शायद , या फिर गमो का जिओसिन्क्लाइन या फिर गमोसिंन्कलाइन
और ख्वाहिसो पे कोई लगाम तो है नहीं , मेक्सिकन घोडो के जैसे भागती हैं ,कहाँ तक कोई रोक पाता है
ठण्ड बढ़ गई और गाड़ी कि लेट लतीफी भी ...मुझे खुशी है .....मुझे रेलवे स्टेसन से अजीब ही लगाव् है ,,,जिंदगी टुकडो में दिखती है यहाँ , कोई खुशी में जा रहा है , कोई गम में , कोई गम न हो इसलिए जा रहा है , कोई इसलिए कि खुशी जिदगी भर साथ रहे ......लेकिन सब दीखते एक हे जैसे हैं पेशानी पे लेट लतीफी कि चिंता लिए हुए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,.....ठण्ड बढते ही मेरी सिगरेट जलती है ........किसी कि रकीब थी ये सिगरेट ........
आज पूरा २ साल हो गया , तभी स्टेसन आया था , बाकि मेरी कोई गाड़ी नही आने वाली , न ही मैं कहीं जाने वाला हूँ ,...........रजाई से तो ब्रेकअप कर लिया था पढाई से नही कर पाउँगा ..........
हर बार जनवरी ऐसी ही होती है अब
....................................................WRITTEN ON – 4-JAN-2011(11PM)
                                                                 


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