ठीक है ठीक है ,महीनो होने आये थे बातो में वो सुकून बाकी नही रही थी ,ठीक है कोई बात नहीं । सिर्फ वो ही थोड़े ही जिम्मेदार थी , आपने भी तो अपने हुनर को तराशने के लिए अपनी संपूर्ण शक्ति किसी करियर रुपी कुए में दे मारी थी , उसने भी दे मारी तो क्या हुआ जो आठ महीने पहले तक आपने रिश्ते की रस्सी बिना गिरह के सम्भाल के रखी थी आज उसमे जो तनाव आया वो काफी था उसे तोड़ने के लिए सो टूट गया
इस दौरान महीने गुज़र चुके, कई मौसम गुज़र गए दुनिया फिर से मंदी की कगार पे है इस बीच जाने कितनी रूहे भटक गयी कितनी लडकियां निर्भया हो गयी कितनो को ग़ुरबत ने अपना शिकार बना लिया और आप प्यार का रोना रो रहे हैं ? लानत है आप पर
मुझे नहीं पता था उस रात मैंने किस मनः स्थिति में ईमेल खोल दी और मुझे बातो में लरज हीनता और कुर्बतो की ग़ुरबत का एक नया ही कारन देखने मिला ।तुमने तो बताना भी जरुरी नही समझा के तुम जड़ पर अटैक कर रहे हो , तुम समूल नष्ट करने वाले हो जबकि ये ही करार तो हम सालो से निभाते आ रहे थे ।बता देते तो सुकून से रिजर्वेशन करा के रिश्ते की मय्यत निकालने आते , टिक के रहना पसंद किसको है
लेकिन बात यहाँ पसंद ना पसंद की नही थी हमने तो इसको मुसलसल सिर्फ इसलिए जारी रखा क्युकी हम दोनों को ही इसमें म्यूच्यूअल बेहतरी थी ।
कभी हमको यकीं था गुमान था , दुनिया हमारी जो मुखालिफ हो तो हो जाये मगर तुम मेहरबान हो
हमको वो बात वैसे याद तो अब क्या है लेकिन हाँ उसे यक्सर भुलाने में अभी कुछ दिन लगेंगे
बदलाव म्यूच्यूअल मस्ती में चाहिए होता है उस केस में बंदा हुनर नही तराश पाता
ठीक है , कोई बूँद नही चाहती की वो जिस पत्ते पर टिकी है उससे अलग हो लेकिन जब महीने गुजर जाये बिना हलचल के फिर भी आप उसी स्थान विशेस पर अपने प्यार की कब्र खुदवाना चाहे तो आपसे बड़ा लुल्ल कोई नही । सब बदलना चाहते हैं तो हम ही क्यू ठहरे रहना चाहते थे हमको नही पता। जिसे चूमा है अगर उसकी भी यही रजा है के जल्दी से निचे फिसल कर अंजाम तक पंहुचा जाये
तुम किसी को भी देख लो सब प्रयोगार्थ उपलब्ध हैं ,कोई भी हो मैं ,तुम, कोई और या कोई और । जो जितना सुन्दर उसकी प्रयोग धर्मिता उतनी अधिक , जो कम सुन्दर उसकी प्रयोग सार्थकता उतनी ही कम। अपनी ही बात कर लो , ईमानदारी से बोलो तो सुबह से ना जाने कितनी बार कहा कहा इस्तेमाल हो चुके होंगे
कोई किसी के लिए हमेसा के लिए नहीं है , पल विशेष में कौन कब कैसे टूट जायेगा कोई आईडिया नही
कब आपकी प्रयोग धर्मिता नैराश्य में बदल जाय किसी को नही पता ।
उत्प्रेरक की भांति काम लिए जाते हैं -
मैंने लिए तुमने लिए किसी और ने लिए हम दोनों ने किसी और से लिए
मेरे पास आज भी तुम्हारी आवाजो के कतरे पड़े हैं ,सकेर कर रखे थे एक जगह लेकिन इतनी जल्दी उनको खोलने पड़ेगा ये नही पता था ।सूचना प्रोद्योगिकी से लैस इस रिश्ते में नेटवर्क की वो कमी पेश की है तुमने की तुम्हारी एक जरा सी भी जिन्दा खबर नही है मुझे ,और तुम्हे मेरी
कुछ अंतिम प्रयास जो मेरी तरफ से किये गए वो असफल इसलिए हुए क्युकी आज भी मेरा मकसद बेहतरी का था मस्ती का नही।तुम्हारी हुनर-तराश कोशिशो को कोई बट्टा ना लगे इसलिए मैंने कोई कदम नही उठाया , उठाऊंगा भी नहीं क्युकी मेरे पास बहुत कुछ ऐसा है करने को जो बाद में मुझे वैसे नैराश्य में कम से कम नही भेजेगा जैसा तुमने उस खिली धुप के नीचे बंद कमरे में मुझे दिया था। रही सही कसर मेरी खुद्दारी और तुम्हारे अहम् ने पूरी कर दी
एक तरह से सही भी हुआ , कम से कम मैं खुद एक रिश्ते को तोड़ने के पाप से बच गया वरना कल को मेरे फेमिनिस्म को झटका लगता जब हम अपनी औकात दिखाते जैसे तुमने दिखा दी हालाँकि हमारे लिए वो स्वाभाविक ना होता तुम्हारे तो स्वभाव में ही है शायद
अभी कोई गम नही है , सुकून है तुम भी खुश हो अपन भी एकदम मस्त