सुनने में आया था कि सुषमा स्वराज ने बयां दिया कि दो के बदले दस सर काट के लाओ
,गौरतलब हो कारगिल युद्ध के समय इन्ही कि ही तो सरकार थी , तब डी डी नॅशनल पैर ये बताने के लिए कितने सर कटे और काटे गए हर घंटे समाचार सेवा शुरू कि गई थी ....
हमारी राजनीती का विकृत स्वरुप मुझे इतनी जल्दी देखने को मिलेगा ये मेरे पूर्वजो ने सोचा भी न होगा
ऐसा ही कुछ दिमाग में लिए हमारे मौलवी साब लौंग के दो दाने मु में दबा के तिरछी निगाह कर के बोले "भाई ये अपने यहाँ राष्ट्रपति नाम कि चिड़िया कब बोलेगी , अमा एक समय हुआ करता था जब हमारे यहाँ भी राष्ट्रपति हुआ करते थे , ज्यादा नही ये सब के आर नारायणन , और कलाम साहब का किया धरा है ....न इतनी शशक्त रास्त्रपति गिरी दिखाते , न ये अनभिज्ञ पोलिटिक्स वाले मुहर नुमा राष्ट्रपति को नामांकित करते "
मैंने उत्सुकता में आ के बस इतना पूछा मौलवी साहब ठण्ड तो काफी हो चुकी क्या ख्याल है आगे का ..
मौलवी साब भड़क गए , ये मियां आप बात कि बघेल मत बजाओ , मुद्दत के बाद हम मुद्दे कि बात पे आये हैं , और आप हमको सोल दुनी आठ सिखा रहे है ,
भारत सर्कार कि तरह ही , मैं बोल रहा हूँ गैस के दाम बढ़ गए तो सर्कार बोलती है पाकिस्तान में तो हमसे भी ज्यादा हैं गैस के दाम ............अमा मिश्रा जी तुम हे बताओ ये कोई तर्क हुआ , पाकिस्तान में तो राष्ट्रपति भी होते हैं , हमारे यहाँ है क्या , वहाँ कि जम्हूरियत में इतनी औकात होती है कि आये दिन प्रधानमंत्री को उखड फेक देती है और एक हम है जो बस गैस के दाम कॉपी करते हैं
और चिल्ला रहे हैं कि सर काट दिया सर काट दिया ,
हम बोलते हैं हमको भूक लगी है , खाना मिलना चहिये , सरकार बोलती है आपकी शर्ट का रंग कला क्यों नहीं है
महिला कड़ी हुई , सुरक्षा के बारे में पुछा तो बोले आपको भारत में रहना चाइये क्युकी वहाँ रेप नही होते , कुछ लक्षम्न रेखा के बारे में बक रहे थे ,
पान कुतरते हुए , अबे ये भी कोई बात हुई , शीशे के खोल में लपेट के रख दिए जाते हैं , अंदर से बोलते हैं हरी ओम , बलात्कारियों को भैया बोलो ,रेप कि नौबत ही न आएगी .....और निचे लोग ताली बजाते हैं ......और सबसे बड़ी बात कमबख्त ये कि जितने ताली बजाते है उनमे से कोई भी भूखा नंगा नही होता ........
कहने के बापू से बोलो कभी बिहार जा के वहाँ भी कभी आधे पाँव पानी में डुबो कर धान कि रोपाई कर के हरी ओम बोले , अच्छा न हरी ओम सही , भैया ही बोल, दे ..................खेत भर पानी में चुल्लू भर पानी न नसीब होगा साब को ....बात करते हैं
................................अरे मियां क्यों गुस्सा रहे हो इतना , ठीक है मान लिया कुछ सही नही है
............................................"ठीक है " तो बोलो ही मत , यहाँ आम आदमी कि ऊँगली सीधी से टेढ़ी हो गई , पर घी न निकला , निकला तो बस "ठीक है "
सब गडबड झाला है बंधू , हम बोलते हैं हमको सड़क दो वो बोलते हैं आपके जूते काले क्यों हैं ,
हम बोलते हैं पाकिस्तान वाला मामला रफा दफा क्यों नही करते तो बोलते हैं ,वीसा आन अराइवल
हमने बोला बातचीत ही कर लो तो बोल दिए just chilll dhondu
कबीर साब कहे थे
रंगी को नारंगी कहे , बने दूध को खोया
चलती को गाडी कहे , देख कबीरा रोया

No comments:
Post a Comment