बड़े अजीब किस्म के इंसान हो तुम , कभी तो आसान रहा करो ...
ठंडी सड़क के किनारे खड़ी गाडियों के सीसो पे हाथ से लकीरे बनाती हुई वो ऐसा ही कुछ बोली . मुझे ठीक से सुनायी नही दिया क्युकी मैं इस बात में व्यस्त था की सेंट्रल डेल्ही की सडको पे बी इतना सन्नाटा हो सकता है रात १० बजे ........
इस बात से अंदाजा लगाया की ठण्ड वाकई जादा है
दिन भर मोक टेस्ट्स देने के बाद बहुत जादा थकन थी सो दोनों एवे ही टहलने निकले थे
मैंने कहा "आसान ही हूँ तभी नही समझ आता , और सच बोलू तो मुझे दुनिया नही समझ आती , पता नही किस लिफाफे में बंद हो कर के सारे काम करती है , हर आदमी अपनी अपनी कमजोरियों को एक कोने में दबा कर रखता है और दुनिया के सामने एक आइडियल इमेज दिखअत है , बस वो कोना बड़ा होता जा रहा है कोई उसपे ध्यान नही देता , हो सकता है मैं भी न देता हूँ
तुम्हारी नजर में जो आसान होना है शाययद मेरी नजर में वो पेचीदा होना ...
जूस शॉप के आगे बनी सीढियों पे बैठे हुए -
सबके तरीके अलग अलग है जीने के , तुम अपने तरीके से सबको देखोगे तो सब अलग ही दिखेंगे न
सबके तरीके अलग अलग है जीने के , तुम अपने तरीके से सबको देखोगे तो सब अलग ही दिखेंगे न
जो फिल्मे तुमको पसंद हैं वो केवल बमुश्किल २० % लोगो को पसंद हैं ,एक दो एक्सेप्शन छोड़ दो
......और जो तुमको नही पसंद वो अस्सी फीसद लोग पसंद करते हैं तो इसका क्या मतलब है की अब भी तुम सही हो
बीच में ही टोकते हुए मैं ..... फिल्मे बन ही कहाँ रही हैं आज कल ....देखो फिल्म में एक कहानी होती है , उस कहानी को रिप्रेजेंट करने के लिए कुछ एक्टर एक्ट्रेस चाहिये होते हैं .......आज कल कुछ एक्टर एक्ट्रेस उठा के लाये जाते हैं और उनको रिप्रेजेंट करने के लिए एक कहानी चाहि ये होती है ..मतलब कांसेप्ट ही उल्टा हो गया है ........और जितने अस्सी फीसद उस जानिब भागते है वो इसलिए क्युकी उन्होंने बीस फीसद वाले लोगो की फिल्म देखि ही नही हैं
जब तक आप बेस्ट नही जानते आप बुरे को भी अच्छा ही कहेगे
जावेद अख्तर साब एक दिन केजरीवाल से प्रश्न पूछ रहे थे "आप का विज़न क्या है आदर्श इंडिया को लेकर "
बातो बातो में जावेद अख्तर साब बोले "आप दो दिन पाकिस्तान रह के आइये , भारत वापस आयेंगे तो भारत की धरती को चूमेंगे "
केजरीवाल साब ने बड़ा उम्दा जवाब दिया "आप एक घंटे के लिए सीरिया में हो आइये , आप पाकिस्तान की धरती को चूमेंगे "
आप को तुलना ही करनी है तो पहले आप जाने तो के ऊपर के लेवल्स पे है क्या , अँधेरे में तीर चलाने से क्या होगा .......
मैंने अपनी बात रखी , वो चुप है ,
खैर छोडो ! चलो ठण्ड बढ़ रही है
कल तीन चार दिन का अख़बार पलटना है ...
रोज उचक कर झाकना चाहती है आवारगी
कुछ दिनों से शरीफ दिखाई देने लगी है
किसी शब् नुक्कड़ से उठा कर उर्दू पहन ली थी इसने

No comments:
Post a Comment