Saturday, 15 December 2012

कानपुर ( दस सवा दस का वक्त )



सूरज दो दिनों से मस्ती कर रहा है , छुट्टी पे है शायद ... सारा आसमान खुदा ने इन रंग बदलते बदलो के हवाले कर दिया है ........उस दिन रेलवे स्टेसन पर उसको छोड़ के वापस आते वक्त गोल चक्कर से घुमते , उलटे हाथ पहला टर्न लिया , वही चाय कि दूकान फिर से दिख गयी ...बगल वाले मंदिर के बाहर अब दो चार भिखारी ज्यादा दिख रहे थे ....गाड़ी धीमी कर के तेजाब मिल वाली गली में झाकने कि कोशिश .....4-5 सेकेंड्स मुश्किल से गुजरे होंगे ..बारिश की बूंदे गाड़ी में बज रहे FM को धीमा कर देती हैं ....पीछे से कोई होर्न मारता है ! मुड के देखने पे गुस्से में इशारा करता है .... ऐतराज है तो क़द्र करनी पड़ी ……आगे बढ़ जाता हूँ ,…….कुछ साल पुरानी चाय कि मिठास फिर से ताजा होती है ....
9-DEC-2012 , KANPUR .. दस सवा दस का वक्त 

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