कॉलेज बंद था, सारे स्टुडेंट्स कमर में बंद थे , दो दिन से सर्द हवा के साथ बारिश चल रही थी हॉस्टल के बहार अभी कोई दिख नही रहा था ,दो दिन से बिजली भी पूरी तन्मयता से गायब थी ....
राहुल निकिता के कमरे में था , दो दिन से दोनों इकोनोमिक रेफोर्म्स के प्रोस एंड कोंस डिस्कस कर रहे थे ......दरवाजा नोक किया , राहुल सिगरेट है ? ....नहीं...आगे बढ़ जाता है ...ओके बहार जा रहा है क्या क्या ?.... हाँ ....सुट्टा धारी कहाँ जायेगा इतनी ठण्ड में ...........जवाब नही मिलता
बारिश के दिनों में राते जादा काली दिखती हैं , वो मफलर लपेटे हुए हाई नेक पहने हुए बहार निकलता है ......पानी छतों से ऐसे गिर रहा था जैसे दिवाली में पटाखे जलते हैं ..बीच बीच में ऑटो और हाई स्पीड कार सुनाई देती है ...........
सिगरेट का धुआं ....तभी एक महीन सी आवाज ,इतनी रात को क्या कर रहे हो ....... कुछ नहीं ....बस यूँ ही ठंडी हवा को देखने आया था , तुम दिख गई ........
बस बस अब तुम शायरी मत शुरू कर देना ....
एक हल्का ठहाका लगाने कि कोशिश ,लाइटर गिर जाता है
महीन सी आवाज –“अच्छा हुआ ! कुछ चीजे गिरने पे अच्छा होता है ”
रात तो थी लेकिन अभी वो रात वाली साये साये और झींगुर वाली झाए झाए कहीं दूर अंचल में ह शायद ऐसा लग रहा था ............ या फिर कुछ देर रुक कर उससे और बात करने का induced एफ्फेक्ट था ,
Generally favourable स्थितियां हम खुद ही बना लेते हैं , जैसे “आज तो इंडिया हार ही जायेगी शर्त लगा लो” -..........मतलब अगर हारे तो मेरी शर्त कि जीत , जीते तो इंडिया कि जीत , दोनों हे केस में मुझे खुशी तो होनी ही है ..........चित भी मेरी पट भी मेरी
वो कुछ गुनगुना रही थी , बारिश कि बूंदे ढोल कि थाप के जैसे उसके गाने को support दे रहे थे , हलकी वाली बूंदे audience कि तालियाँ समझ लो
“मूवी देखने चलोगे क्या ?”
.....कब ....
…..तुम बताओ कब ...
मैं अगर अभी बोलूँगा तो चलना पड़ेगा .....
“हा हा , चलो ”
....मेरे पास बाइक नहीं है .....
तो ऑटो से चलते हैं .....
9 बजे वाला शो तो शुरू हो गया होगा .....ऑटो से लेट हो जायेंगे ..
.......इतना सोच रहा है , इतनी देर में ऑटो वाले से किराया सेट कर लेते .............
ऐसा क्या , चलो ऐसे हे बैठ जाते हैं ........
......महीन सी आवाज अचानक गाइड मूवी कि वहीदा रहमान के जैसे दिल ही दिल में “आज फिर जीने कि तमन्ना है..............” गुनगुना रही हो जैसे .........
वो पहली बार शायद रात को निकलने को लेकर अजीब सी खुशी में गोते में लगा रही थी
उस दिन एक बात और realize हुई .....हमारे समाज में इस तरह के भी कई बटवारे हैं , एक जिसमे लकडियों ,महिलाओ को आजादी है , एक वो जिसमे रिस्ट्रिक्टेड आजादी है ........और एक वो जिसमे उनको आजादी का परिभाषा एक्साम्प्ल दे दे कर समझाई जाती है , THEY don’t actually know
what the freedom is …
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एक इमोशनल सीन, फिल्म देखते देखते ,उसने उसकी बांह पकड़ ली है …… फिल्म में गुम है , उंगलियों के दबाव घटते बढते से हैं वो उसकी तरफ देख भी रहा है............वो बालो को कान के पीछे करती है ...
बारिश अभी भी है , हाल से निकलने में वो उसका हाथ पकडे हुई है , .ऑटो अब तो गिने चुने ही चल रहे हैं सो , कोई किराया नही पूछता ! कानपुर वैसे भी जल्दी सोने और जल्दी जागने वाला शहर है ..........
वो बोलता है -
“कुछ सीन मूवी के छिपे हुए होते हैं , बेचारे director ने तो उनको भी दिखने के लिए मेहनत कि होती है , लेकिन प्राइमरी सब्जेक्ट के आगे वो सीन subsidiary हो जाते है , वो चीजे बेक ग्राउंड में होती हैं , डिरेक्टर कि क्रेअटीविटी उन सीन में ही दिखती है , लेकिन वो सेंट्रल पॉइंट के आगे फोटोजेनिक रह जाते हैं , पता है दरअसल सेन्ट्रल में रहना क्या है-- बैक ग्राउंड में रहना ......
“कुछ सीन मूवी के छिपे हुए होते हैं , बेचारे director ने तो उनको भी दिखने के लिए मेहनत कि होती है , लेकिन प्राइमरी सब्जेक्ट के आगे वो सीन subsidiary हो जाते है , वो चीजे बेक ग्राउंड में होती हैं , डिरेक्टर कि क्रेअटीविटी उन सीन में ही दिखती है , लेकिन वो सेंट्रल पॉइंट के आगे फोटोजेनिक रह जाते हैं , पता है दरअसल सेन्ट्रल में रहना क्या है-- बैक ग्राउंड में रहना ......
मैं जब फिल्म दूसरी बार देखता हूँ तो इन बातों पे ही ध्यान जाता है तब मैं बेक ग्राउंड पे हे फोकस करता हूँ
महीन से खिलीआवाज – “तुमने देखी हुई थी फिल्म ”
Yes first day first show…..
.....तो फिर क्यों देखी आअज ........(बोलते बोलते रुक जाती है )
.....तो फिर क्यों देखी आअज ........(बोलते बोलते रुक जाती है )
She couldn’t see him directly now she put her eyes downwards and pretended
as she was watching the moving black road , so
He tried to change the topic but could not ….
The auto driver had to look back two times then
,as usual , driver smiled too ,while
shaking his head like he was criticizing something what he wished to see
हॉस्टल आ गया , कितना हुआ – दे दो सर जो समझो ,
महीन आवाज “ हस्ते हुए , for god sake , अब तुम आई लव यू मत कहना”
वो मुस्कुराता है , , एक सिगरेट जलती है
रूम कि तरफ जाते हुए कहती है “बोयस हू स्मोक ,मस्ट कीप सम चुइंगम विद देम ..... ”

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