कुछ शौक आपको उम्र से बड़ा
बना देते हैं , कुछ शौक आपको शौक से बढ़ कर सोचने पे मजबूर करते हैं ........मैंने
साइकिल चलाना तब सीखा था जब आठवी में था ....शायद इसीलिए दुपहिया और चार पहिया का शौक अभी तक बरकरार है .......... कॉलेज में
मैं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कभी भाग नही लेता था लेकिन उनको आरगनाइज करने
में बहुत योगदान करता था .......मेरा काम अक्सर मेहमानों अतिथियों को स्टेसन से
उठा कर लाना होता था (दक्षिण भारतीय प्रिंसिपल कि भासा यही थी , श्री xyz स्टेसन पे है उठा लाओ ).........एक एन जि ओ और NACO का कैंप लगना था चमनगंज में
इस बार , मुझे(AGE 19) ,राधे(AGE 20) दीपक(19) शिवम(सत्तरा का था , लेकिन साथ आने के लिए EIGHTEEN लिखवाया था ) और निकिता(AGE 18) को volunteer के लिए चुना गया था ...मुझे AS USUAL डाक्टरों को “उठा के लाने” कि जिम्मेदारी दी गई थी
.......चमनगंज में पान कि पीको के बीच बसी एक OVERPOPULATED बस्ती ............वहाँ सब अलग ही दीखता है ,
मैं अजीब से प्रेशर में था ......मेरे
सामने ५ महिलाओ या फिर यूँ कहो “लड़कियां जिनको महिला बना दिया गया था", का रिजल्ट
पॉजिटिव निकला था , मैं खुद को उन पांचो के सामने रोक नही पाया ....बहार निकल के आ
गया , सिगरेट जलाया ............बहार पीपल का पेड़ था , बगल में NACO कि वेन खड़ी थी ..पास में किसी ने हनुमान जि का बुत रखकर मंदिर
बना दिया था ......मूर्तिया बड़ी खामोश होती हैं , कोई भी कहीं भी रख देता है
,,,,कभी कुछ शिकायत नही करती ......यहाँ एक बात और क्लेअर हो गई , टिकते वही है जो
शिकायत नही करते जैसे इन दैवीय बुतों को ही ले लो .....................और सबसे बड़ी बात ,उनके सामने
कोई भी बुरे से बुरा काम होता रहे वो भगवान कि बेशर्मी को प्रदर्शित करती हुई
मुस्कराती ही रहती है .....उस मंदिर को देख के जेहन में बस एक ही पंक्ति किसी के
भी दिल में आ सकती है –जला दो इसे फूँक डालो ये दुनिया....
...................
गायत्री जी, मेरे बगल में आ कर बोलती हैं हस्ते हुए – बहार सिगरेट पीने आये हो , अंदर तो न जाने क्या क्या होता है सिगरेट कौन बड़ी बात है ...SEX WORKER बोलते हैं ..
....मैं उखड़ी आवाज में “जनता हूँ ” ................ओह जानते हो , ओके
....कुछ नेपाल से है कुछ पाकिस्तानी हिंदू हैं .......
एक लड़की १० साल कि शायद , काले घुंगरालेबाल दो चुटिया , लाल फीते से बंधे हैं , सांवला रंग रेड फ्रोक में ....... मैं गौर से उसे देख हे रहा था ........कि आवाज आती है , ये सोना है , पॉजिटिव है ( गायत्री जी ने बताया)
“जन्म भी क्या अजीब एक्सीडेंट है इसके लिए , अक्षम्य अपराध है खुदा का जो इसको पैदा होने दिया ”
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गायत्री जी, मेरे बगल में आ कर बोलती हैं हस्ते हुए – बहार सिगरेट पीने आये हो , अंदर तो न जाने क्या क्या होता है सिगरेट कौन बड़ी बात है ...SEX WORKER बोलते हैं ..
....मैं उखड़ी आवाज में “जनता हूँ ” ................ओह जानते हो , ओके
....कुछ नेपाल से है कुछ पाकिस्तानी हिंदू हैं .......
एक लड़की १० साल कि शायद , काले घुंगरालेबाल दो चुटिया , लाल फीते से बंधे हैं , सांवला रंग रेड फ्रोक में ....... मैं गौर से उसे देख हे रहा था ........कि आवाज आती है , ये सोना है , पॉजिटिव है ( गायत्री जी ने बताया)
“जन्म भी क्या अजीब एक्सीडेंट है इसके लिए , अक्षम्य अपराध है खुदा का जो इसको पैदा होने दिया ”
, स्टेसन से लाते वक्त एक
डॉक्टर साब से अच्छी दोस्ती हो गई थी , वो अंदर चाय के लिए बुलाते हैं ........तकरीबन
एक घंटा एक्सामिन हुआ सबका ..... ऊपर खिडकी से फटी साडी के बने परदे को हटा कर कुछ लड़कियां झांक रही है
, अपनी जिंदगी में पहले कुछ शख्स मैंने ऐसे देखे थे जिनकी आँखों में सपने नही थे
........मैंने उन डाक्टर साब से तभी
बोला था कि अगली दफे कानपुर आये तो मुझसे जरुर मिल लेना .....आप ये सब जो कर रहे
है काबिले तारीफ है ...
..............तभी बहार कुछ शोरगुल हुआ था
, तीन चार बोलेरो में कुछ सफ़ेद स्वच्छ कपड़ो में १५ २० लोग , देखने में देश के रहनुमा टाइप
लग रहे थे .......आगे वाले तीन के गले में सोने कि मोटी चैन ,, कलाई पे रुद्राक्ष
गुथी हुई थी ........मोटी आवाज में एक बोलता है “ऐ ये किसका तमाशा है , कौन किया
है ये कैंप यहाँ ”गायत्री जी आगे आती है ,
हमारा NGO,
स्टेट गोवेंमेंट से अप्रोवेड है ये कैंप.................... .......मोटी आवाज थोडा और मोटी हुई
– अरे तुम लोग ही तो कैंप लगा लगा के इस
गंदगी को यहाँ से जाने नही दे रहे हो , अरे ये मरेंगी तभी तो साफ़ होगी ये बदबू
यहाँ से .........अभी तुम लोग इनको कंडोम बांटोगे तो इनको बढ़ावा ही मिलेगा न धंधा
करने के लिए .............ऐ डॉक्टर उठाओ ये अपना तीम झाम, हो गया सब AIDS test phest …..तीन चार पुलिस वाले अंदर आते हैं ....मैंने भी सामान उठाने में मदद कि , दवाइयां अभी पैकेड ही रखी थी , डॉ साब भी
अब गाडी में बैठ गए .....मैं तेजी से गाड़ी निकालता हूँ ,,,सामने सोना आ जाती है मैं
जोर से होर्न देता हूँ , तो मु में कुछ बुदबुदा के टेढ़ी निगाह कर के चली जाती है
...जैसे हमारा मजाक उडा रही हो ......................डॉ. मेरे से बोले , बोलिए ओम
जी किसका काम कबीले तारीफ है मेरा या उन का .......मैं शीशा खोल के अपना गुस्सा
रिक्शा वाले पे निकलता हु “अबे जब नही चल पा रहा है तो किनारे चल न “
Badi sanjeeda soch rakhi ! Good work.. barkarar rakho(Y)
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